णमो सिद्धाणं, जे त्ति परं गयाणं, सिद्धि इक्कंठयाणं। वीयराग रूवाणं, अमय रस जीहालयाणं।
श्री शत्रुंजय आदिजीण आव्या, पूर्व नव्वाणु वार जी; अनंत लाभ इहां जीनवर जाणी, समोसर्या निर्धार जी। palitana 5 chaityavandan in hindi full